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Aug 4, 2014

प्राण प्रतिष्ठा

                                                  

मौन हुआ तो अन्तः शक्ति
बोल उठा तो अभिव्यक्ति /


नेत्र बंद फिर ध्यान लगाया

कल्पित देव , मन में ध्याया /

पूज आराधन औ गुण गान

यही सहज था वही महान /

यही ,यही तो मनुष्य भाव है

पत्थर पूजें दिव्य भाव है /

मूर्ति बना यदि पूजा उसको

माना देवता ,भाव शक्ति को /
हम चेतन अव्यक्त रूप थे

प्रेम प्रीति के ऊर्ज रूप थे /

जड़ता के प्रेमी बन बैठे

इस शरीर में व्यक्त हो उठे /

मानो इश्वर कवि जैसा है

ऊर्जस्वित वह रवि जैसा है/

हम चैतन्य जड़ में स्थित

प्रेम प्रीति को करें विस्तरित /

जैसा स्रोत बने हम वैसे

ईश भाव की कविता जैसे //


4 comments:

कालीपद प्रसाद said...

मौन हुआ तो अन्तः शक्ति
बोल उठा तो अभिव्यक्ति /
नेत्र बंद फिर ध्यान लगाया
कल्पित देव , मन में ध्याया /
पूज आराधन औ गुण गान
यही सहज था वही महान /
बहुत सुन्दर !
: महादेव का कोप है या कुछ और ....?
नई पोस्ट माँ है धरती !

Amrita Tanmay said...

अति सुन्दर ...

Sunil Jadhav said...

सुंदर रचना

Tarun Sharma said...

nice....
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