29 दिस॰ 2012

ओ निर्भया !

ओ निर्भया !
हिल गया हिमालया 
संभले न संभलती अब हृदय की पीर 
छलक उठे अश्रु ,बह उठे नेत्र नीर ,/
ये छह मानव  , पशु से भी बदतर 
ये  दानव हैं ,पशु भी इनसे  बेहतर /
क्रूर से भी क्रूर ,वो छह नशे में चूर ,
माँ याद करे किलकारी ,बेटी हुई दूर /
 बेटी के आर्तनाद से ,कांपी होगी धरा ,
आर्यावर्त देश ,बच्चे बच्चे का दिल भरा /
रात्रि में वोह   कालिमा थी बस ,
वो  बस में ,बेबस थी जस की तस /
अब वहां ना था कुछ शेष  ,
अरे मानव ! बस तेरा अवशेष  
बस तेरा अवशेष  !

Featured Post

नेता महान

मै भारत का नेता हूँ  नेता नहीं अभिनेता हूँ  चमचे चिपकें जैसे गोंद  धोती नीचे हिलती तोंद // मेरी तोंद बढे हो मोटी  सारे चेले सेंक...