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Jan 17, 2012

" जल"

" जल" प्रारंभ सृष्टि का
वो वराह के दांतों में पृथिवी
इसी जल से तो निकली थी
अरी ओ माँ पृथ्वी
जल प्लावित पृथ्वी
मनु के शब्दों से गुंजित
मानवता का भान कराती
ओ चेतना की अनुभूति
ओ पृथ्वी बिन जल
क्षीर सागर का क्या
अस्तित्व हो पाता !
जल से जीव सृष्टि का ,
क्या फिर प्रारंभ हो पाता !

पेंटिंग

कूंची की लहर
वो दृष्टि की गहराई
इधर उधर
भाव समेटे
रंगों के भाव
लकीरों में भाव
वो निराकार को
आकर में बदलती
समवेत कून्चियाँ
भाव से सृष्टि
सृष्टि की एक रचना
मेरी रचना ,
मेरी पेंटिंग //

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