If you’re on Twitter, go ahead and follow me and say hello.

Feb 23, 2012

दहलीजों के पार बुला ले

चुपके चुपके झाँका करता
चेहरा चाँद नज़र आ जाता
दरवाजे की ओट खड़ा सा
फिर पीछे मैं हट सा जाता /
नयन सजीले नयन झुकाती
मंद मंद वो क्यूँ मुस्काती /तन्द्रिल आँखों में मधुरिम से
कोमल स्वप्न सलोने लाती /
फूलों पर फिर उड़ें तितलियाँ
बदली गरजे ,गिरे बिजलियाँ
मौन होंठ भी कह ना पाते
कम्पन सा अन्दर भर जाते /
लुका छिपी ये आखिर कब तक
रहूँ खड़ा मैं आखिर कब तक
दूर दूर अब पास बुला ले
दहलीजों के पार बुला ले //


11 comments:

Isha said...

sunder ehsaas......

neeraj said...

:)

maddy said...

its awsome.. hw perfectly aapne sayonja hai apne words ko ki kaise "dahlejo ke paar bula le".. :) its really awesome. i shared it on twitter :)

संध्या शर्मा said...

लुका छिपी ये आखिर कब तक
रहूँ खड़ा मैं आखिर कब तक
दूर दूर अब पास बुला ले
दहलीजों के पार बुला ले //

वाह...बहुत सुन्दर है आज की अभिव्यक्ति...

Suman said...

nice

Amrita Tanmay said...

स्निग्ध भावों को बिखेरती सुन्दर रचना ..

neeraj said...

thnx

Naveen from Toronto said...

Beautiful...

babanpandey said...

प्यार में तो दहलीज़ पार करनी hi पड़ती है ... सुंदर रचना /
शुभ होली

anoop yadav said...

bahut khoob sir

Neeraj Tyagi said...

धन्यवाद !

Followers