Feb 2, 2012

"क्या लिखें"

क्या लिखें ,
क्या कहें ,
और सुने
किस को ?
ये जीवन अब ,
बन गया ,
दुनिया का डिस्को !
खाएं पीयें
मौज उड़ायें ,
सो जाएँ /
जिम में जाएँ
वज़न घटायें /
ज्यादा गर सोचा तो
धमनियां बढ़ जाएँगी
जो न सोचा वो सोचोगे
टेंशन बढ़ जाएगी /
इसीलिये भूल जाओ
संस्कृति औ संस्कृत को
मै कोक हूँ वो केक है ,
भूलो पुरातन सब ,
अपना लो यही ,
पेप्सी कोला
कल्चर को //

3 comments:

ana said...

kaise bhool jaye ...ham apne ap ko ...sochne ke liye majboor kar diya apki kawita ne...badhiya

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

neeraj said...

:)thnx